भारत बंद: विद्युत, बीज और श्रम संहिता कानूनों के खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी बंद

देश में 12 फरवरी, 2026 को भारत बंद का ऐलान किया गया है। यह बंद राष्ट्रीय स्तर के चौदह ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इसमें केंद्रीय और राज्य सेवाओं के कर्मचारी, शिक्षक, केंद्रीय और राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों के मजदूर और स्वतंत्र ट्रेड यूनियन के सदस्य शामिल हैं। किसान संगठन संगठित किसान मोर्चा (SKM) ने भी किसानों से बंद का समर्थन करने का आह्वान किया है। इस बंद का मकसद सरकार से चार नए श्रम संहिता, विद्युत संशोधन विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और पशुपालन कानून 2025 को रद्द कराने की मांग करना है।
घर से निकलते समय ध्यान रखने योग्य बातें
भारत बंद का सीधा असर सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, बाजार और बैंकों पर पड़ेगा। शहरों और ग्रामीण इलाकों में ट्रैफिक अवरुद्ध हो सकता है। बस, टैक्सी और लोकल ट्रेन सेवाओं में बाधा आएगी। कई दुकानें और रेस्टोरेंट बंद रह सकते हैं। हवाई अड्डे सामान्य रूप से काम करेंगे, लेकिन ट्रैफिक जाम की वजह से यात्रियों को अतिरिक्त समय रखना पड़ेगा। विशेष रूप से, सड़क मार्गों पर “चक्का जाम” की संभावना बनी रहेगी।

स्कूल, कॉलेज और बैंक पर प्रभाव
केंद्रीय स्तर पर स्कूलों और कॉलेजों में अधिकारिक छुट्टी घोषित नहीं की गई है। हालांकि, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भारी स्थानीय समर्थन के कारण शिक्षण संस्थान बंद रह सकते हैं। माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय स्कूल प्रशासन से संपर्क करें। वहीं, बैंकों में सार्वजनिक सेवाओं पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि AIBEA, AIBOA और BEFI सहित बैंक कर्मचारी संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।
बंद के पीछे की मांगें और कारण
इस बंद को 10 से अधिक ट्रेड यूनियनों के गठबंधन ने बुलाया है। इसमें INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। किसानों और मजदूरों की मांग है कि चार नए श्रम संहिता और नवंबर 2025 में अधिसूचित नियम रद्द किए जाएं, बीज विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक और ड्राफ्ट पीस एक्ट को वापस लिया जाए, MGNREGA को बहाल किया जाए, और विक्शित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के खिलाफ विरोध जताया जाए। ट्रेड यूनियनों और किसानों ने कहा है कि बंद के माध्यम से वे अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।